श्रीरंग-स्तुति
Spread the Glory of Sri SitaRam!श्रीरंग-स्तुति ५७ देव– देहि सतसंग निज-अंग श्रीरंग! भवभंग-कारण शरण-शोकहारी। ये तु भवदघ्रिपल्लव-समाश्रित सदा, भक्तिरत,विगतसंशय,मुरारी ॥
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इंटरनेट पर श्रीरामजी का सबसे बड़ा विश्वकोश | RamCharitManas Ramayana in Hindi English | रामचरितमानस रामायण हिंदी अनुवाद अर्थ सहित
Spread the Glory of Sri SitaRam!श्रीरंग-स्तुति ५७ देव– देहि सतसंग निज-अंग श्रीरंग! भवभंग-कारण शरण-शोकहारी। ये तु भवदघ्रिपल्लव-समाश्रित सदा, भक्तिरत,विगतसंशय,मुरारी ॥