गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न। बंदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न॥18॥
Spread the Glory of Sri SitaRam!श्रीगणेशायनमः | Shri Ganeshay Namah श्रीजानकीवल्लभो विजयते | Shri JanakiVallabho Vijayte श्रीरामचरितमानस | Shri RamCharitManas
Read More