बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेजपुंज लछिमन उर लागी॥ मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें॥4॥
Spread the Glory of Sri SitaRam!श्रीगणेशायनमः | Shri Ganeshay Namah श्रीजानकीवल्लभो विजयते | Shri JanakiVallabho Vijayte श्रीरामचरितमानस | Shri RamCharitManas
Read More