पुनि रघुनाथ चले बन आगे। मुनिबर बृंद बिपुल सँग लागे॥ अस्थि समूह देखि रघुराया। पूछी मुनिन्ह लागि अति दाया॥3॥
Spread the Glory of Sri SitaRam!श्रीगणेशायनमः | Shri Ganeshay Namah श्रीजानकीवल्लभो विजयते | Shri JanakiVallabho Vijayte श्रीरामचरितमानस | Shri RamCharitManas
Read More