कहत धरम इतिहास सप्रीती। भयउ भोरु निसि सो सुख बीती॥ नित्य निबाहि भरत दोउ भाई। राम अत्रि गुर आयसु पाई॥1॥
Spread the Glory of Sri SitaRam!श्रीगणेशायनमः | Shri Ganeshay Namah श्रीजानकीवल्लभो विजयते | Shri JanakiVallabho Vijayte श्रीरामचरितमानस | Shri RamCharitManas
Read More