कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।। मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।
Spread the Glory of Sri SitaRam!श्रीगणेशायनमः | Shri Ganeshay Namah श्रीजानकीवल्लभो विजयते | Shri JanakiVallabho Vijayte श्रीरामचरितमानस | Shri RamCharitManas
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