पौलोमपर्व Pauloma Parva with Hindi Translation
॥ श्रीहरिः ।।
श्रीगणेशाय नमः
॥ श्रीवेदव्यासाय नमः ॥
श्रीमहाभारतम्
आदिपर्व
पौलोमपर्व
चतुर्थोऽध्यायः
कथा- प्रवेश
लोमहर्षणपुत्र उग्रश्रवाः सौतिः पौराणिको नैमिषारण्ये शौनकस्य कुलपतेर्द्वादशवार्षिके सत्रे ऋषीनभ्यागतानुपतस्थे ।। १ ।।
नैमिषारण्यमें कुलपति शौनकके बारह वर्षोंतक चालू रहनेवाले सत्रमें उपस्थित महर्षियोंके समीप एक दिन लोमहर्षणपुत्र सूतनन्दन उग्रश्रवा आये। वे पुराणोंकी कथा कहने में कुशल थे । १ ॥
पौराणिकः पुराणे कृतश्रमः स कृताञ्जलिस्तानुवाच ।
किं भवन्तः श्रोतुमिच्छन्ति किमहं ब्रवाणीति ॥ २ ॥
वे पुराणोंके ज्ञाता थे। उन्होंने पुराणविद्यामें बहुत परिश्रम किया था। वे नैमिषारण्यवासी महर्षियोंसे हाथ जोड़कर बोले- ‘पूज्यपाद महर्षिगण ! आपलोग क्या सुनना चाहते हैं? मैं किस प्रसंगपर बोलूँ?’ ।। २ ॥